जय करुणावतार (Jai Karunavatar) — वो 1 बार जब शिव एक आदिवासी शिकारी के वेश में आए और अपने भक्त के साथ-साथ चले — सब कुछ प्रकट करने से पहले
जय करुणावतार शिव को करुणा के साक्षात अवतार के रूप में पहचानना है — वो दूर की दिव्य करुणा नहीं जो ऊपर से देखती है, बल्कि वो करुणा जो उतरती है, एक विनम्र रूप धारण करती है, और साधक के सबसे कठिन मार्ग में उसके साथ चलती है — फिर वो सब प्रकट करती है जो वो हमेशा से थी।